श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  4.22.58 
तावन्योन्यं समाश्लिष्य प्रकर्षन्तौ परस्परम्।
उभावपि प्रकाशेते प्रवृद्धौ वृषभाविव॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
फिर वे दोनों आपस में उलझकर एक दूसरे को खींचने लगे। उस समय वे दो बलवान बैलों के समान सुन्दर दिखाई दे रहे थे। 58।
 
Then both of them got entangled and started pulling each other. At that time they looked beautiful like two strong bulls. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)