श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.22.51 
निराबाधा त्वयि हते सैरन्ध्री विचरिष्यति।
सुखमेव चरिष्यन्ति सैरन्ध्रया: पतय: सदा॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे मारे जाने पर सैरन्ध्री निर्भय होकर विचरण करेगी और उसका पति भी सदैव प्रसन्न रहेगा ॥ 51॥
 
‘After you are killed, Sairandhri will move about without fear and her husband will also always remain happy.’॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)