श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.22.32 
सत्यं भ्रातॄंश्च धर्मं च पुरस्कृत्य ब्रवीमि ते।
कीचकं निहनिष्यामि वृत्रं देवपतिर्यथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैं सत्य, धर्म और अपने भाइयों की शपथ लेकर कहता हूँ कि जैसे देवताओं के राजा इन्द्र ने वृत्रासुर को मारा था, वैसे ही मैं भी कीचक को मार डालूँगा॥ 32॥
 
I swear by truth, righteousness and my brothers that just as the King of the Gods Indra killed Vritraasura, I too will kill Keechaka in the same manner.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)