श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.22.30 
भीमसेन उवाच
स्वागतं ते वरारोहे यन्मां वेदयसे प्रियम्।
न ह्यन्यं कञ्चिदिच्छामि सहायं वरवर्णिनि॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले- वररोहे! आपका स्वागत है; क्योंकि आपने मुझे ऐसी कथा सुनाई है जो मुझे बहुत प्रिय है। सुंदरी! मैं इस कार्य में किसी और की सहायता नहीं करना चाहता।
 
Bhimsen said- Vararohe! You are welcome; because you have told me a story that pleases me. Beautiful lady! I do not want to help anyone else in this task.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)