श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.22.28 
दर्पाच्च सूतपुत्रोऽसौ गन्धर्वानवमन्यते।
तं त्वं प्रहरतां श्रेष्ठ ह्रदान्नागमिवोद्धर॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे आक्रमणकारियों में श्रेष्ठ! वह सारथीपुत्र अपने पराक्रम के गर्व में गन्धर्वों की उपेक्षा करता है; अतः उसे इस संसार से उसी प्रकार निकाल फेंको, जैसे जल से सर्प को निकाल दिया जाता है॥ 28॥
 
O best of the attackers! That son of a charioteer, in the pride of his valour, disregards the Gandharvas; therefore, throw him out of this world like a snake from a water body.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)