श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.22.27 
तं सूतपुत्रं कौन्तेय कीचकं मददर्पितम्।
गत्वा त्वं नर्तनागारं निर्जीवं कुरु पाण्डव॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! पाण्डुनन्दन! तुम नृत्यशाला में जाओ और उस मतवाले सूतपुत्र कीचक को मार डालो। 27॥
 
Kuntikumar! Pandunandan! You go to the dance hall and kill that intoxicated Suta's son Kichak. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)