श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.22.25 
तमुवाच सुकेशान्ता कीचकस्य मया कृत:।
संगमो नर्तनागारे यथावोच: परंतप॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सुन्दर जटाओं वाले श्रीकृष्ण बोले - 'शत्रु! जैसा तुमने कहा था, वैसा ही मैंने कीचक को नृत्यशाला में मिलने का संकेत किया है॥ 25॥
 
There Krishna with beautiful locks of hair said, 'Enmity! As you said, I have indicated to Keechak to meet me in the dance hall.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)