vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध
»
श्लोक 19
श्लोक
4.22.19
कीचकोऽथ गृहं गत्वा भृशं हर्षपरिप्लुत:।
सैरन्ध्रीरूपिणं मूढो मृत्युं तं नावबुद्धवान्॥ १९॥
अनुवाद
कीचक बड़े हर्ष से भरकर अपने घर गया। उस मूर्ख को यह पता नहीं था कि मृत्यु सैरंध्री के रूप में उसके पास आ रही है।
Keechak went to his home filled with great joy. That fool did not know that death was coming to him in the form of Sairandhri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×