श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.22.16 
द्रौपद्युवाच
यदेतन्नर्तनागारं मत्स्यराजेन कारितम्।
दिवात्र कन्या नृत्यन्ति रात्रौ यान्ति यथागृहम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली - कीचक! मत्स्यराज द्वारा निर्मित इस नृत्यशाला में कन्याएँ दिन में नृत्य करती हैं और रात्रि में अपने-अपने घर चली जाती हैं।
 
Draupadi said - Keechak! In this dance hall built by Matsyaraj, the girls dance during the day and go to their respective homes at night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)