श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.22.15 
समागमार्थं रम्भोरु त्वया मदनमोहित:।
यथा त्वां नैव पश्येयुर्गन्धर्वा: सूर्यवर्चस:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे रम्भोरु! मैं काम से मोहित होकर तुम्हारे पास इस प्रकार समागम के लिए आऊँगी कि सूर्य के समान तेजस्वी गन्धर्व भी उस समय तुम्हें मेरे साथ नहीं देख सकेंगे॥15॥
 
O Rambhoru! I will be captivated by lust and will come to you for intercourse in such a manner that the Gandharvas who are as radiant as the Sun, will not be able to see you with me at that time. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)