vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध
»
श्लोक 14
श्लोक
4.22.14
कीचक उवाच
एवमेतत् करिष्यामि यथा सुश्रोणि भाषसे।
एको भद्रे गमिष्यामि शून्यमावसथं तव॥ १४॥
अनुवाद
कीचक बोला- ठीक है। सुश्रोणि! आप जैसा कहेंगी, वैसा ही मैं करूँगा। भद्रे! मैं अकेला ही आपके सूने घर में जाऊँगा॥14॥
Keechak said- All right. Sushroni! I will do as you say. Bhadre! I will go alone to your empty house.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×