श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.22.12 
द्रौपद्युवाच
एवं मे समयं त्वद्य प्रतिपद्यस्व कीचक।
न त्वां सखा वा भ्राता वा जानीयात् संगतं मया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली- कीचक! यदि ऐसी बात है, तो आज मेरी एक शर्त मान लो। तुम मुझसे मिलने आ रहे हो - यह बात किसी को भी, चाहे वह तुम्हारा मित्र हो या भाई, पता नहीं चलनी चाहिए॥ 12॥
 
Draupadi said- Keechak! If this is the case, then accept one of my conditions today. You are coming to meet me- no one, be it your friend or brother, should know this.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)