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श्लोक 4.21.26  |
इत्युक्ते चाब्रुवं मत्तं कामातुरमहं पुन:।
न त्वं प्रतिबलश्चैषां गन्धर्वाणां यशस्विनाम्॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| उसके इस प्रकार उत्तर देने पर मैंने उसके अभिमानी और मदोन्मत्त पुत्र कीचक से पुनः कहा - 'केचक! तुम मेरे यशस्वी पतिदेव गंधर्वों के समान बलवान नहीं हो॥ 26॥ |
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| On his reply in this manner I again said to his arrogant and intoxicated son Keechak - 'Kechak! You are not as strong as the Gandharvas, my illustrious husband.॥ 26॥ |
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