vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 21: भीमसेन और द्रौपदीका संवाद
»
श्लोक 25
श्लोक
4.21.25
शतं शतसहस्राणि गन्धर्वाणामहं रणे।
समागतं हनिष्यामि त्वं भीरु कुरु मे क्षणम्॥ २५॥
अनुवाद
हे कायर! यदि युद्ध में एक करोड़ गन्धर्व भी मेरे सामने आ जाएँ, तो मैं उन सबको मार डालूँगा; परन्तु तू मेरी बात मान ले॥ 25॥
O coward! If even one crore Gandharvas come in front of me in the war, I will kill them all; but you must accept me.'॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×