vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 21: भीमसेन और द्रौपदीका संवाद
»
श्लोक 24
श्लोक
4.21.24
एवमुक्त: सुदुष्टात्मा कीचक: प्रत्युवाच ह।
नाहं बिभेमि सैरन्ध्रि गन्धर्वाणां शुचिस्मिते॥ २४॥
अनुवाद
मेरे ऐसा कहने पर महादुष्टात्मा कीचक ने कहा, 'हे शुद्ध मुसकराती सैरन्ध्री! मैं गन्धर्वों से नहीं डरता।
When I said this, the great evil soul Keechak replied, 'O pure smiling Sairandhri! I am not afraid of the Gandharvas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×