vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 21: भीमसेन और द्रौपदीका संवाद
»
श्लोक 16
श्लोक
4.21.16
यथैता: कीर्तिता नार्यो रूपवत्य: पतिव्रता:।
तथा त्वमपि कल्याणि सर्वै: समुदिता गुणै:॥ १६॥
अनुवाद
कल्याणी! जिस प्रकार इन सुन्दरी, पतिव्रता स्त्रियों को आदर्श बताया गया है, उसी प्रकार तुम भी समस्त गुणों से सम्पन्न होओ॥16॥
Kalyani! Just as these beautiful, devoted women have been described as ideals, in the same way you too should be full of all the virtues. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×