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श्लोक 4.21.15  |
द्युमत्सेनसुतं वीरं सत्यवन्तमनिन्दिता।
सावित्र्यनुचचारैका यमलोकं मनस्विनी॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| द्युमत्सेन के पुत्र वीर सत्यवान की मृत्यु के बाद सती साध्वी मनस्विनी सावित्री अकेली ही यमलोक चली गयी थीं। 15॥ |
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| Sati Sadhvi Manaswini Savitri had gone alone to Yamlok following the death of the brave Satyavan, son of Dyumatsen. 15॥ |
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