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श्री महाभारत
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श्लोक 15
श्लोक
4.21.15
द्युमत्सेनसुतं वीरं सत्यवन्तमनिन्दिता।
सावित्र्यनुचचारैका यमलोकं मनस्विनी॥ १५॥
अनुवाद
द्युमत्सेन के पुत्र वीर सत्यवान की मृत्यु के बाद सती साध्वी मनस्विनी सावित्री अकेली ही यमलोक चली गयी थीं। 15॥
Sati Sadhvi Manaswini Savitri had gone alone to Yamlok following the death of the brave Satyavan, son of Dyumatsen. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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