vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 21: भीमसेन और द्रौपदीका संवाद
»
श्लोक 12
श्लोक
4.21.12
दुहिता जनकस्यापि वैदेही यदि ते श्रुता।
पतिमन्वचरत् सीता महारण्यनिवासिनम्॥ १२॥
अनुवाद
तुमने जनकनन्दिनी वैदेही सीता का नाम अवश्य सुना होगा। वे अपने पति श्री रामचन्द्रजी के पीछे-पीछे चली थीं, जो अत्यन्त घने वन में रहते थे।॥12॥
You must have heard the name of Janakanandini Vaidehi Sita. She had followed her husband Shri Ramchandraji who lived in a very dense forest. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×