श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.20.9 
दैवेन किल यस्यार्थ: सुनीतोऽपि विपद्यते।
दैवस्य चागमे यत्नस्तेन कार्यो विजानता॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अच्छी नीति से सुरक्षित वस्तु भी यदि ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध हो, तो भाग्य द्वारा नष्ट हो जाती है; इसलिए बुद्धिमान पुरुष को भाग्य को अपने अनुकूल बनाने का प्रयत्न करना चाहिए ॥9॥
 
Even a thing which is protected by good policy is destroyed by the fate if it is against the will of God; hence a wise man must try to make the fate favorable to him. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)