श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.20.31 
तौ गृहीत्वा च कौन्तेयो बाष्पमुत्सृज्य वीर्यवान्।
तत: परमदु:खार्त इदं वचनमब्रवीत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तब बलवान भीमसेन ने उन हाथों को पकड़कर, आँसू बहाते हुए और महान शोक में डूबे हुए इस प्रकार कहा ॥31॥
 
Then the mighty Bhima, holding those hands, shedding tears and being in great sorrow, said thus. ॥ 31॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि द्रौपदीभीमसंवादे विंशोऽध्याय:॥ २०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें द्रौपदी-भीम-संवादविषयक बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)