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श्लोक  4.20.3 
अनित्या किल मर्त्यानामर्थसिद्धिर्जयाजयौ।
इति कृत्वा प्रतीक्षामि भर्तॄणामुदयं पुन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य की सफलता और हार अस्थायी हैं। वे स्थायी नहीं हैं। यही सोचकर मैं अपने पतियों के पुनरुत्थान की प्रतीक्षा करती हूँ। 3.
 
The success and defeat of human beings are temporary. They are not permanent. Thinking this, I wait for the resurgence of my husbands. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)