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mahabharat 4.20.28: वह बार-बार गहरी साँस लेती हुई, आँसुओं से रुँधी हुई वाणी में भीमसेन के हृदय को झकझोरती हुई इस प्रकार बोली -॥28॥   |   mahabharat अध्याय 4.20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.20.28 
सा बाष्पकलया वाचा नि:श्वसन्ती पुन: पुन:।
हृदयं भीमसेनस्य घट्टयन्तीदमब्रवीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वह बार-बार गहरी साँस लेती हुई, आँसुओं से रुँधी हुई वाणी में भीमसेन के हृदय को झकझोरती हुई इस प्रकार बोली -॥28॥
 
Taking deep breaths again and again, she spoke in a voice choked with tears, shaking the heart of Bhimasena thus -॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)