श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.20.26 
किं नु वक्ष्यति सम्राण्मां वर्णक: सुकृतो न वा।
नान्यपिष्टं हि मत्स्यस्य चन्दनं किल रोचते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय मैं सोचता हूँ कि, ‘महाराज मेरे विषय में क्या कहेंगे? यह लेप अच्छा बना है या नहीं?’ मत्स्यराज को मेरे अतिरिक्त अन्य किसी के हाथ का बनाया हुआ चन्दन अच्छा नहीं लगता॥ 26॥
 
At that time I think, 'I wonder what the Emperor will say about me? Is this paste prepared well or not?' The King of Matsyas does not like sandalwood prepared by anyone else except me.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)