Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.20.25: (फिर वह सिसकते हुए बोली-) 'प्रभु! वही द्रौपदी जो पूर्वकाल में आर्या कुन्ती से अथवा आप लोगों से भी कभी नहीं डरी, आज राजा विराट के सामने दासी बनकर भयभीत खड़ी है।' | mahabharat अध्याय 4.20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बिभेमि कुन्त्या या नाहं युष्माकं वा कदाचन।
साद्याग्रतो विराटस्य भीता तिष्ठामि किङ्करी॥ २५॥
अनुवाद
(फिर वह सिसकते हुए बोली-) 'प्रभु! वही द्रौपदी जो पूर्वकाल में आर्या कुन्ती से अथवा आप लोगों से भी कभी नहीं डरी, आज राजा विराट के सामने दासी बनकर भयभीत खड़ी है।'
(Then she said sobbingly -) 'Lord! The same Draupadi who never feared Arya Kunti or even you people in the past, today stands as a maidservant in fear before King Virat.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥