श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  4.20.20-21 
पश्य पाण्डव मेऽवस्थां यथा नार्हामि वै तथा।
युष्मासु ध्रियमाणेषु पश्य कालस्य पर्ययम्॥ २०॥
यस्या: सागरपर्यन्ता पृथिवी वशवर्तिनी।
आसीत् साद्य सुदेष्णाया भीताहं वशवर्तिनी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! देखो, तुम सबके जीवित रहते हुए मेरी ऐसी दुर्दशा हो रही है, जो मेरे लिए बिलकुल भी अच्छी नहीं है। समय का यह चक्र तो देखो, एक दिन समुद्र पर्यन्त समस्त पृथ्वी उसी के अधीन थी, जिसके अधीन आज मैं सुदेष्णा के अधीन हूँ और उसी से भयभीत हूँ।
 
Son of Pandu! Look, while you all are alive I am in such a bad condition, which is not at all good for me. Look at this twist and turn of time; one day the whole earth up to the sea was under the control of the one who, today I am under the control of Sudeshna and am afraid of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)