श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.20.12 
कुरून् परिभवेत् सर्वान् पञ्चालानपि भारत।
पाण्डवेयांश्च सम्प्राप्तो मम क्लेशो ह्यरिंदम॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! हे शत्रुओं का नाश करने वाले! मुझ पर जो दुःख आया है, वह समस्त कौरवों, पांचालों और पाण्डवों के लिए कलंक का विषय है॥12॥
 
Bharata! O destroyer of enemies! The suffering that has befallen me is a matter of disgrace for all the Kauravas, Panchalas and Pandavas. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)