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mahabharat 4.2.22: जिनकी दोनों भुजाएँ समान रूप से विशाल हैं; धनुष की डोरी के आघात से उनकी त्वचा कठोर हो गई है। जैसे बैलों के कंधों पर जूए की रगड़ से निशान पड़ जाते हैं, वैसे ही उनकी दाहिनी और बाईं भुजाओं पर धनुष की डोरी के रगड़ने से निशान पड़ गए हैं॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 4.2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.2.22 
यस्य बाहू समौ दीर्घौ ज्याघातकठिनत्वचौ।
दक्षिणे चैव सव्ये च गवामिव वह: कृत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जिनकी दोनों भुजाएँ समान रूप से विशाल हैं; धनुष की डोरी के आघात से उनकी त्वचा कठोर हो गई है। जैसे बैलों के कंधों पर जूए की रगड़ से निशान पड़ जाते हैं, वैसे ही उनकी दाहिनी और बाईं भुजाओं पर धनुष की डोरी के रगड़ने से निशान पड़ गए हैं॥ 22॥
 
Whose both arms are equally huge; their skin has hardened due to the impact of the bowstring. Just as the rubbing of the yoke leaves marks on the shoulders of the bulls, similarly the rubbing of the bowstring on his right and left arms has left marks.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)