श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  4.2.11-12 
युधिष्ठिर उवाच
यमग्निर्ब्राह्मणो भूत्वा समागच्छन्नृणां वरम्।
दिधक्षु: खाण्डवं दावं दाशार्हसहितं पुरा॥ ११॥
महाबलं महाबाहुमजितं कुरुनन्दनम्।
सोऽयं किं कर्म कौन्तेय: करिष्यति धनंजय:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - जो महान बल और महान भुजाओं वाले मनुष्यों में श्रेष्ठ हैं, जो साक्षात् अग्निदेव भगवान श्रीकृष्ण के साथ बैठकर खाण्डव वन को जलाने की इच्छा से ब्राह्मण रूप में अर्जुन के पास आये थे, जो कुरुकुल को आनन्द देने वाले हैं और किसी से पराजित न होने वाले हैं, वे कुन्तीनन्दन धनंजय विराटनगर में क्या कार्य करेंगे? 11-12॥
 
Yudhishthir said - Who is the best among human beings with great strength and great arms, who was the fire god in person who had come to Arjun in the form of a Brahmin with the desire to burn the Khandav forest while sitting with Lord Shri Krishna, who gives joy to the Kurukula and is not going to be defeated by anyone, what work will that Kuntinandan Dhananjay do in Viratnagar? 11-12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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