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श्लोक  4.2.10 
आत्मानमात्मना रक्षंश्चरिष्यामि विशाम्पते।
इत्येतत् प्रतिजानामि विहरिष्याम्यहं यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं अपनी रक्षा करता हुआ विराट नगर जाऊँगा। मुझे विश्वास है कि मैं वहाँ सुखपूर्वक रह सकूँगा॥10॥
 
O King, I shall go to Virat's city while protecting myself. I am sure that I shall be able to live there happily.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)