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mahabharat 4.19.5: जब राजा विराट प्रसन्न होकर तुम्हें हाथियों से लड़ाते हैं, तो महल की अन्य स्त्रियाँ हँसती हैं, जबकि मेरा हृदय शोक से भर जाता है।   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.19.5 
यदा प्रहृष्ट: सम्राट् त्वां संयोधयति कुञ्जरै:।
हसन्त्यन्त:पुरे नार्यो मम तूद्विजते मन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब राजा विराट प्रसन्न होकर तुम्हें हाथियों से लड़ाते हैं, तो महल की अन्य स्त्रियाँ हँसती हैं, जबकि मेरा हृदय शोक से भर जाता है।
 
When King Virata, in his joy, makes you fight with elephants, the other women in the palace laugh while my heart becomes filled with grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)