श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.19.43 
अभ्यकीर्यन्त वृन्दानि दामग्रन्थिमुदीक्ष्य तम्।
विनयन्तं जवेनाश्वान् महाराजस्य पश्यत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उसे देखते ही शत्रु सेनाएँ तितर-बितर होकर भाग जाती हैं। अब वह मार्गदर्शक बनकर घोड़ों की लगाम खोलता और ढीली करता है तथा राजा के सामने उन्हें तेज दौड़ना सिखाता है ॥ 43॥
 
On seeing him the enemy forces scatter and run away. Now he becomes the guide who unties and loosens the reins of the horses and teaches them to run fast in front of the King. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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