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mahabharat 4.19.41: हे पाण्डवपुत्र! जब मैं देखता हूँ कि योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव गौओं की सेवा में तत्पर रहते हैं और रात्रि में बछड़ों की खाल पर सोते हैं, तब मैं क्यों जीवित रहूँ?॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.19.41 
तं दृष्ट्वा व्यापृतं गोषु वत्सचर्मक्षपाशयम्।
सहदेवं युधां श्रेष्ठं किं नु जीवामि पाण्डव॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डवपुत्र! जब मैं देखता हूँ कि योद्धाओं में श्रेष्ठ सहदेव गौओं की सेवा में तत्पर रहते हैं और रात्रि में बछड़ों की खाल पर सोते हैं, तब मैं क्यों जीवित रहूँ?॥ 41॥
 
O son of Pandava! When I see that Sahadeva, the best among warriors, devoted to the service of cows and sleeping at night on the skin of calves, why should I continue to live?॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)