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श्लोक  4.19.37 
सहदेवं हि मे वीर नित्यमार्या प्रशंसति।
महाभिजनसम्पन्न: शीलवान् वृत्तवानिति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वीर! आर्या कुंती मुझसे सदैव सहदेव की प्रशंसा करती थीं कि वह महान कुल में उत्पन्न हुआ है, चरित्रवान और गुणवान है। 37.
 
Brave! Arya Kunti always praised Sahadev to me that he was born in a great family and was of good character and virtuous. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)