श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.19.37 
सहदेवं हि मे वीर नित्यमार्या प्रशंसति।
महाभिजनसम्पन्न: शीलवान् वृत्तवानिति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वीर! आर्या कुंती मुझसे सदैव सहदेव की प्रशंसा करती थीं कि वह महान कुल में उत्पन्न हुआ है, चरित्रवान और गुणवान है। 37.
 
Brave! Arya Kunti always praised Sahadev to me that he was born in a great family and was of good character and virtuous. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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