श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.19.34 
न विन्दामि महाबाहो सहदेवस्य दुष्कृतम्।
यस्मिन्नेवंविधं दु:खं प्राप्नुयात् सत्यविक्रम:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! जहाँ तक मैं जानता हूँ, सहदेव ने कभी कोई पाप नहीं किया, जिसके कारण इस वीर योद्धा को ऐसा दुःख भोगना पड़ रहा है॥34॥
 
Mahabaho! As far as I know, Sahadev has never committed any sin, due to which this valiant warrior has to suffer such pain. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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