श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.19.26 
भूषितं तमलंकारै: कुण्डलै: परिहाटकै:।
कम्बुपाणिनमायान्तं दृष्ट्वा सीदति मे मन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों के आभूषणों और स्वर्ण कुण्डलों से सुसज्जित तथा हाथों में शंखचूड़ियाँ लिए हुए अर्जुन को आते देखकर मेरा हृदय दुःखी हो रहा है॥26॥
 
My heart becomes sad to see Arjun coming adorned with feminine ornaments and golden earrings and holding conch shell bangles in his hands. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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