Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.19.22-23: जिस प्रकार समुद्र अपने तट को पार नहीं कर सकता, उसी प्रकार हजारों राजा अपने अतुलनीय तेज से भी वीर योद्धा को परास्त करने के लिए आगे नहीं बढ़ सके, वही युवा अर्जुन अब राजा विराट की पुत्रियों को नृत्य सिखा रहा है तथा नपुंसक का वेश धारण कर उनकी सेवा कर रहा है। | mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस प्रकार समुद्र अपने तट को पार नहीं कर सकता, उसी प्रकार हजारों राजा अपने अतुलनीय तेज से भी वीर योद्धा को परास्त करने के लिए आगे नहीं बढ़ सके, वही युवा अर्जुन अब राजा विराट की पुत्रियों को नृत्य सिखा रहा है तथा नपुंसक का वेश धारण कर उनकी सेवा कर रहा है।
Just as the ocean cannot cross its shore, similarly thousands of kings with their matchless brilliance could not advance to subdue the brave warrior, the same young Arjuna is now teaching dance to the daughters of King Virat and serves them while disguised as a eunuch.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥