श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.19.21 
यस्मिन्नस्त्राणि दिव्यानि समस्तानि महात्मनि।
आधार: सर्वविद्यानां स धारयति कुण्डले॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो महात्मा सम्पूर्ण दिव्यास्त्रों से युक्त है और जो समस्त विद्याओं का आधार है, वह आज अपने कानों में (स्त्रियों के समान) कुण्डल धारण करता है।॥21॥
 
The great soul who possesses all the divine weapons and who is the basis of all knowledge, today wears earrings in his ears (like women). ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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