श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.19.20 
तं वेणीकृतकेशान्तं भीमधन्वानमर्जुनम्।
कन्यापरिवृतं दृष्ट्वा भीम सीदति मे मन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भीम! जब मैं वीर अर्जुन को भयंकर गाण्डीव धनुष धारण किये, युवतियों से घिरे, सिर पर जटाएँ बाँधे देखता हूँ, तो मेरा हृदय दुःख से भर जाता है।
 
Bhima! My heart fills with sadness when I see the brave Arjuna, wielding the dreadful Gandiva bow and surrounded by girls, with plaited hair on his head.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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