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श्लोक 4.19.18  |
यस्य ज्यातलनिर्घोषात् समकम्पन्त शत्रव:।
स्त्रियो गीतस्वनं तस्य मुदिता: पर्युपासते॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| उसके धनुष की ध्वनि से सारे शत्रु काँप उठते थे, आज भीतरी महल की स्त्रियाँ उसके गीतों की ध्वनि सुनकर प्रसन्न होती हैं। |
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| The sound of his bow used to make all enemies tremble, today the women of the inner palace listen to the sound of his songs and become happy. 18. |
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