Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.19.17: वही धनंजय जिसकी भुजाएं धनुष की डोरी खींचते समय लोहे की छड़ों के समान मोटी हो गई थीं, आज हाथों में शंख की चूड़ियां पहने हुए पीड़ा सह रहा है।   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.19.17 
यस्य ज्याक्षेपकठिनौ बाहू परिघसंनिभौ।
स शङ्खपरिपूर्णाभ्यां शोचन्नास्ते धनंजय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वही धनंजय जिसकी भुजाएं धनुष की डोरी खींचते समय लोहे की छड़ों के समान मोटी हो गई थीं, आज हाथों में शंख की चूड़ियां पहने हुए पीड़ा सह रहा है।
 
The same Dhananjaya whose arms had become as thick as iron rods while pulling the bowstring is today suffering pain wearing conch shell bangles in his hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)