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mahabharat 4.19.12: और मुझे क्रोधित देखकर वह मेरे तुम्हारे प्रति गुप्त प्रेम पर संदेह करती है। जब कभी वह ऐसी बातें कहती है, तो मुझे बड़ा दुःख होता है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.19.12 
क्रुध्यन्तीं मां च सम्प्रेक्ष्य समशङ्कत मां त्वयि।
तस्यां तथा ब्रुवत्यां तु दु:खं मां महदाविशत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
और मुझे क्रोधित देखकर वह मेरे तुम्हारे प्रति गुप्त प्रेम पर संदेह करती है। जब कभी वह ऐसी बातें कहती है, तो मुझे बड़ा दुःख होता है॥12॥
 
And seeing me angry, she suspects my secret love for you. Whenever she says such things, I feel very sad.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)