Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.19.1: द्रौपदी बोलीं - भरत! अब मैं जो दुःख तुम्हें सुनाने जा रही हूँ, वह मेरे लिए और भी बड़ा है। इसके लिए मुझे दोष मत दो। मैं यह सब इसलिए कह रही हूँ क्योंकि मैं दुःख से व्यथित हूँ॥1॥ | mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपद्युवाच
इदं तु ते महद् दु:खं यत् प्रवक्ष्यामि भारत।
न मेऽभ्यसूया कर्तव्या दु:खादेतद् ब्रवीम्यहम्॥ १॥
अनुवाद
द्रौपदी बोलीं - भरत! अब मैं जो दुःख तुम्हें सुनाने जा रही हूँ, वह मेरे लिए और भी बड़ा है। इसके लिए मुझे दोष मत दो। मैं यह सब इसलिए कह रही हूँ क्योंकि मैं दुःख से व्यथित हूँ॥1॥
Draupadi said - Bharat! The sorrow that I am going to tell you now is even greater for me. Do not blame me for this. I am saying all this because I am distressed with sorrow.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥