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mahabharat 4.18.d4-d5h: हे पाण्डुपुत्र! इस प्रकार तुम्हारे जीवित रहते ही मुझे मेरे केशों से पकड़कर मेरे दोनों श्वसुरों तथा दुर्योधन आदि भाइयों के सामने राजसभा में लाया गया।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक d4-d5h
 
 
श्लोक  4.18.d4-d5h 
साहं श्वशुरयोर्मध्ये भ्रातृमध्ये च पाण्डव॥
केशे गृहीत्वैव सभां नीता जीवति वै त्वयि।)
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! इस प्रकार तुम्हारे जीवित रहते ही मुझे मेरे केशों से पकड़कर मेरे दोनों श्वसुरों तथा दुर्योधन आदि भाइयों के सामने राजसभा में लाया गया।
 
O son of Pandu! In this manner, while you were still alive, I was caught by my hair and brought to the royal court in the presence of my two father-in-laws and brothers like Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)