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श्लोक 4.18.d14  |
स चेदुद्यन्तमादित्यं प्रातरुत्थाय पश्यति।
कीचक: शर्वरीं व्युष्टां नाहं जीवितुमुत्सहे॥ ) |
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| अनुवाद |
| यदि इस रात्रि के बीत जाने के बाद कीचक प्रातः उठकर उगते हुए सूर्य को देखेगा तो मैं जीवित नहीं बच पाऊँगा। |
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| If Keechak wakes up in the morning after this night is over and sees the rising sun, I will not be able to survive. |
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