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mahabharat 4.18.d14: यदि इस रात्रि के बीत जाने के बाद कीचक प्रातः उठकर उगते हुए सूर्य को देखेगा तो मैं जीवित नहीं बच पाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  4.18.d14 
स चेदुद्यन्तमादित्यं प्रातरुत्थाय पश्यति।
कीचक: शर्वरीं व्युष्टां नाहं जीवितुमुत्सहे॥ )
 
 
अनुवाद
यदि इस रात्रि के बीत जाने के बाद कीचक प्रातः उठकर उगते हुए सूर्य को देखेगा तो मैं जीवित नहीं बच पाऊँगा।
 
If Keechak wakes up in the morning after this night is over and sees the rising sun, I will not be able to survive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)