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mahabharat 4.18.d12-d13: हे पाण्डुपुत्र पुरुषसिंह! जिस प्रकार साठ वर्ष का मतवाला हाथी भूमि पर गिरे हुए बेल के फल को पैरों से दबाकर कुचल देता है, उसी प्रकार तुम भी कीचक का सिर भूमि पर पटककर अपने बाएँ पैर से कुचल दो।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक d12-d13
 
 
श्लोक  4.18.d12-d13 
यथा यूथपतिर्मत्त: कुञ्जर: षष्टिहायन:।
भूमौ निपतितं बिल्वं पद्भॺामाक्रम्य पीडयेत्॥
तथैव च शिरस्तस्य निपात्य धरणीतले।
वामेन पुरुषव्याघ्र मर्द पादेन पाण्डव॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र पुरुषसिंह! जिस प्रकार साठ वर्ष का मतवाला हाथी भूमि पर गिरे हुए बेल के फल को पैरों से दबाकर कुचल देता है, उसी प्रकार तुम भी कीचक का सिर भूमि पर पटककर अपने बाएँ पैर से कुचल दो।
 
Purushsingh, son of Pandu! Just as a sixty-year-old drunken elephant crushes a vine fruit fallen on the ground by pressing it with his feet, in the same way, throw Keechak's head on the ground and crush it with your left foot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)