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mahabharat 4.18.d11: हे पराक्रमी पाण्डवपुत्र! मैं आपके क्रोध, बल और पराक्रम को जानता हूँ; इसीलिए मैं आपके सामने रोता और विलाप करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  4.18.d11 
(विजानामि तवामर्षं बलं वीर्यं च पाण्डव।
ततोऽहं परिदेवामि चाग्रतस्ते महाबल॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी पाण्डवपुत्र! मैं आपके क्रोध, बल और पराक्रम को जानता हूँ; इसीलिए मैं आपके सामने रोता और विलाप करता हूँ।
 
O mighty Pandava son! I know your anger, strength and valour; that is why I cry and wail before you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)