श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.18.9 
तेनोपमन्त्र्यमाणाया वधार्हेण सपत्नहन्।
कालेनेव फलं पक्वं हृदयं मे विदीर्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले! उस वध के योग्य पापी का यह घृणित प्रस्ताव सुनकर मेरा हृदय समय पर पके फल के समान फट रहा है॥9॥
 
O destroyer of enemies! My heart is being torn apart like a fruit ripened in time as I listen to this disgusting proposal from that sinner who deserves to be killed.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)