श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  4.18.7-8 
योऽयं राज्ञो विराटस्य कीचको नाम भारत।
सेनानी: पुरुषव्याघ्र श्याल: परमदुर्मति:॥ ७॥
स मां सैरन्ध्रिवेषेण वसन्तीं राजवेश्मनि।
नित्यमेवाह दुष्टात्मा भार्या मम भवेति वै॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरत! पुरुषसिंह! राजा विराट का यह कीचक नाम का सेनापति उनका साला लगता है। इसकी बुद्धि बड़ी दुष्ट है। मुझे सैरंध्री के वेश में राजमहल में निवास करते देखकर वह दुष्टात्मा प्रतिदिन आकर मुझसे कहती है - 'तुम मेरी पत्नी बन जाओ।'
 
Bharata! Purushsingh! This general named Keechak of King Virata seems to be his brother-in-law. His intelligence is very bad. Seeing me residing in the royal palace in the guise of Sairandhri, that evil soul comes every day and says to me - 'Become my wife'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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