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mahabharat 4.18.32: वीर! पहले जिस भरत के दरबार में दुनिया भर के लोग उसकी पूजा करते थे, आज उसी भरतवंश के शिरोमणि को दूसरे राजा के दरबार में बैठे हुए देखो।   |   mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.18.32 
उपास्ते स्म सभायां यं कृत्स्ना वीर वसुन्धरा।
तमुपासीनमप्यन्यं पश्य भारत भारतम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वीर! पहले जिस भरत के दरबार में दुनिया भर के लोग उसकी पूजा करते थे, आज उसी भरतवंश के शिरोमणि को दूसरे राजा के दरबार में बैठे हुए देखो।
 
Brave! Earlier, people from all over the world used to worship him in the royal court, Bharat! Now see the same Bharatvansh's head jewel sitting in the court of another king today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)