श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्‍गार प्रकट करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.18.3 
पार्थिवस्य सुता नाम का नु जीवति मादृशी।
अनुभूयेदृशं दु:खमन्यत्र द्रौपदीं प्रभो॥ ३॥
 
 
अनुवाद
स्वामिन्! मुझ द्रौपदी पुत्री के अतिरिक्त और कौन राजकुमारी है जो मेरे समान ऐसी पीड़ा सहकर जी रही है?
 
Swamin! Apart from me, the daughter of Draupadi, which other princess is like me who is living while suffering such pain? 3.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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